अशोक स्तम्भ का सम्पूर्ण इतिहास के बारे मे जाने – Ashok Stambh History in Hindi

ashok stambh
ashok stambh

Ashok Stambh History अशोक स्तम्भ का निर्माण मौर्य वंस के तीसरे शासक और भारतीय उपमहाद्वीप के सबसे शक्तिशाली राजा सम्राट अशोक ने अपने शासन कार्यकाल मे ( 272 ई॰ पू॰ से 232 ई॰ पू॰ )  करवाया था। सम्राट अशोक द्वारा इस स्तम्भ और स्तूपो के निर्माण करने का सिर्फ एक ही उद्देस्य था और वह उधेस्य था बौद्ध धर्म के ग्रंथो और उनके सिद्धांतों का प्रसार प्रचार करना और लोंगों को बौद्ध के बारे मे जागरूक करना।

लेकिन सम्राट अशोक ने कभी भी बचपन मे बौद्ध धर्म का ज्ञान नहीं लिया क्योकि उन्हे तो सुरू से ही एक राजा बनाकर शासन करने का सौख था और इसी के चलते सम्राट अशोक ने अपने शासन काल मे भारत के अधिकांश भाग ( अफगानिस्तान से म्यामर ) को जीत कर अपने हिस्से मे कर लिया और अपना नाम एक शक्तिशाली राजाओ की सूची मे अंकित करवा लिया और इसी कारण कई इतिहास कारो ने अपनी पुस्तक मे सम्राट अशोक को एक क्रूर और निर्दय राजा बताया है।

ashok stambh photo
ashok stambh photo
Image Source – Wikipedia.org

इसी प्रकार जब सम्राट अशोक अपने कलिंग युद्ध मे गए तो उन्हे वह पर हर का सामना करना पड़ा और इसी हर के बाद सम्राट अशोक के ह्रदय को बहुत ही आघात पहुचा और उसने अपनी हिंसा आधारित नीति को छोड़ कर धर्म विजय की नीति को अपनाया और उसी के बाद उसने बौद्ध धर्म के ग्रंथो और सिद्धांतों को ग्रहण किया और फिर बौद्ध धर्म के सिद्धांतों के प्रसार के उसने देश के विभिन भागो मे Ashok Stambh के स्पूतों का निर्माण कराया।

अशोक स्तम्भ का इतिहास – Ashok Stambh History

सम्राट अशोक द्वारा कलिंग के युद्ध मे भिसर्ण हिंसा को देखने के बाद उनका ह्रदय को बहुत ही बुरा आघात पहुचा और इसी के बाद सम्राट अशोक ने अपने युद्ध नीति को छोड़ कर धर्म की विजय नीति को अपनाया और उसी के बाद उसने बौद्ध धर्म के ग्रंथो और सिद्धांथों को ग्रहण कर अपने आप को पूरी तरह धर्म प्रचारक मे बादल डाला।

इसी के बाद सम्राट अशोक ने अपने राज्य के विभिन हिस्सो तक बौद्ध धर्म के सिद्धांतों का प्रचार करने के लिए  3 बर्ष के अंदर 84000 ( चौरासी हजार ) स्पूतों का निर्माण किया और उसी अपने राज्य के विभिन जगहो पर स्थापित किया, जिसमे से आपको Ashoka Pillar Sarnath ( सारनाथ ) मे उपस्थित अशोक स्तम्भ के अभी भी अवशेष देखने को मिल सकते है।

इतिहासकारो की माने तो सम्राट अशोक को एक धर्म प्रचारक के रूप मे माना गया है, क्योकि सम्राट अशोक धर्म के प्रचार के लिए कर विभिन कदम उठाए जिसमे सम्राट अशोक ने धर्म के नैतिक उपदेश को जनता तक पहुचने के लिए चौराहो पर कलाकारो से स्तम्भ , चट्टानों पर लेख , पर्वत की सिखायो का सहारा लिया।

आज के समय ने इस अशोक स्तम्भ ( ashok stambh ) को भारत मे राष्ट प्रतीक के तौर पर माना गया है, इस लिए आपको विधानसभा , सरकारी दफ्तर , उच्च न्यालय आदि मे आपको तह स्तम्भ की आकृति देखने को मिल जाती है।

अशोक स्तम्भ का निर्माण

अशोक स्तम्भ के निर्माण की बात करे तो आपको बता दे की इसका निर्माण मौर्य वंस के समय मे सम्राट अशोक के शासन कल मे हुआ था और आज के समय मे आपको उसी समय के बने स्तंब या स्पूतों के अवशेष सारनाथ मे देखने को मिल सकते है।

इस Ashok piller sarnath का निर्माण चुनार के बलुआ पत्थर से 45 फुट के लंबे और गोल दंड का निर्माण किया गया है, इस स्तम्भ के कुछ भाग को जमीन मी डाला गया और बाकी के हिस्से को ऊपर के तरफ से पतला की तरफ बढ़ता हुआ बनाया गया है।

ashok stambh photo
ashok stambh photo
Image source – wikipedia.org

स्तम्भ से ऊपर की तरह से एक उल्टे कमल के फूल की आकृति और फिर उसके ऊपर बैठने लायक एक चौकोर पत्थर का निर्माण किया गया है, इस पत्थर के ऊपर चार सिंह का निर्माण किया गया है जो की एक चरो दिशा मे अपना मुह भाग किए हुये और पीछे का हिस्सा एक समान चिपका हुआ है।

इस आकृति मे आपको सभी सिंह के बीच मे एक पतला स्तम्भ भी देखने को मिल सकता है, जिसमे आपको 32 तिलियो से बना एक चक्र देखने को मिलेगा और इस चक्र की आकृति की बात करे तो आपको तह चक्र की प्रतिमा हमारे भारत देश के तिरंगा मे भी देखने को मिल सकती है।

अशोक स्तम्भ का उद्देश्य

पाली ग्रंथ के अनुसार सिंह को बौद्ध धर्म का पर्याय माना गया है जिस कारण गौतम बुद्ध द्वारा उपदेशित धम्माकक्कप्पवत्ताना ( Dhammacakkappavattana ) को सिंह की गर्जन माना गया है इस कारण से ही सम्राट अशोक ने अपने अशोक स्तम्भ मे सिंह का निर्माण किया है।

इसके अलावा सम्राट अशोक ने सभी सिंह का मुख चारो प्रमुख दिशा मे किया जिसका भी एक बहुत अहम मकसद था, इन सभी सिंह का मुख चारो दिशा मे इस लिए किया गया क्योकि जब कोई भी मनुष्य बौद्ध धर्म की ज्ञान ले लेता तो उसे अपने गुरु के बताए दिशा मे जाकर बौद्ध धर्म का प्रचार करना पढ़ता है, इस कारण से ही सम्राट अशोक ने इस सभी सिंह के आकृति चारो प्रमुख दिशा मे करके बौद्ध धर्म का प्रचार किया।

अशोक स्तम्भ सारनाथ – Ashok stambha Sarnath

सम्राट अशोक के द्वारा बनाए गए चौरासी हजार स्पूतों मे से एक स्तम्भ आपको सारनाथ ( वाराणसी ) मे देखने को मिल जाएगा और इस स्तम्भ का नाम भी सम्राट अशोक के नाम पर देखने को मिल जाएगा, इस स्तम्भ की आकृति की बात करे तो यह देखने मे एक लम्बा व गोलाकार दंड जैसा और ऊपर की तरफ उल्टे कमल की आकृति के ऊपर चार सिंह चारो दिशा मे सिंह गर्जन करते हुये विराजमान है।

ashok stambh sarnath
ashok stambh sarnath
image source – Wikipedia.org

सारनाथ का अशोक स्तम्भ धर्मचक्र परवर्तन की घटना का स्मारक और धर्मसंघ की एकता का स्मारक है, इन सभी सिंह की आकृति के बीच मे आपको 32 तिलियो का धर्मचक्र धारण किए एक दंड था और यह धर्मचक्र भगवान बुद्ध की 32 महापुरुष के लझण का प्रतीक माना गया है।

आज के समय मे भी यह स्तम्भ बिना पालिस और मरमत के अद्भुत है लेकिन इस समय आपको इस स्तम्भ के कुछ अवशेष संघ्रालय मे देखने को मिल सकते और बाकी का अवशेष अद्भुत उसी तरह से स्थित है इसके अलावा इस स्तम्भ के ऊपर तीन लेख भी लिखे गए हो आपको अलग – अलग लिपि मे देखने को मिल सकते है।

अशोक स्तम्भ वैशाली – ashoka pillar vaishali

भगवान बुद्ध को यह स्थान बहुत ही प्रिय था और इसी के कारण सभी बौद्ध धर्म के लोंग इस स्थान की गणना धार्मिक स्थलो मे करने लगे, सम्राट अशोक अपने बौद्ध तीर्थों के भ्रमण के समय इस स्थान पर आया और लोंगों की बौद्ध धर्म के प्रति लगाव देख कर उसने यह पर एक स्तम्भ का निर्माण कराया और इस इस स्तम्भ की बनावट सभी के समान बलुआ चुना पत्थर और सिंह की आकृति का बना है।

ashok stambh pic
ashok stambh pic
image source – wikipedia.org

लेकिन इस स्तम्भ मे केवल एक ही सिंह की आकृति देखने को मिलती और इस का सबसे बड़ा कारण यह की वैशाली स्थान पर भगवान गौतम बुद्ध ने अपना आखिरी उपदेश किया और इसके बाद वह उत्तर दिशा मे भ्रमण करने निकाल गए और इसी के कारण इस स्पूतों से के इसकी आकृति मे केवल एक सिंह उत्तर दिशा की तरफ मुह किए बना है, इस स्तम्भ के बगल मे आपको एक सपूत और तालाब मिलेगा।

 इतिहासकारो की मानो तो इस तलब मे भगवान बुद्ध ने कुछ समय आराम भी किया था और कुछ इतिहासकारो का यह भी मानना है की इस जगह पर उपस्थित तालाब के कारण यहा की भूमि फसल उगाने के लिए बहुत उपजाऊ भी है।

बिधिधर्म का इतिहास हिन्दी मे जाने

सर्वेपाली राजकृष्णन जी की जीवनी

अशोक स्तम्भ इलाहाबाद – Ashok stambh allahabad

इस स्तम्भ का निर्माण 16वी सदी सम्राट अशोक ने नहीं बल्कि सम्राट अकबर ने किया था और इस समय यह स्तम्भ आपको इलाहाबाद के किले मे दिखने को मिलगा और इस स्तम्भ के बाहरी हिस्से पर आपको सम्राट अशोक के द्वारा कहे अभिलेख का खुदा हुआ चित्रण मिलेगा।

sarnath
ashok stambh pic
image source – wikipedia.org

इस स्तम्भ के ऊपर कई लोंगों का कब्जा हुआ और मुगल शासक जहगीर के समय 1800 ई॰ मे तो इस स्तम्भ को गिरा भी दिया गया लेकिन बाद मे इस स्तम्भ को दुबारा से 1838 ई॰ मे अंग्रेज़ो के द्वारा खड़ा किया गया और तब से यह उसी स्थान पर स्थित भी है।

धननंद का इतिहास हिन्दी मे जाने।  

Ssc ki taiyari कैसे करे हिन्दी मे जाने।

अशोक स्तम्भ दिल्ली – Ashok stambh Delhi

Ashok Stambh delhi की बात करे तो इस स्तम्भ का निर्माण तीन सताब्दी ईसा पूर्व सम्राट अशोक के समय मे बनवाया गया और इस स्तम्भ की आकृति भी बाकी के समान की गई, इसी के बाद यह आज भी पालिश के साथ बहुत ही अद्भुत दर्शन देता है।

इस स्तम्भ को लेकर इतिहासकारो का कहना की यह स्तम्भ पहले मेरठ मे स्थित था लेकिन बाद मे जब दिल्ली से 1364 ई  मे फिरोज सह तुगलक मेरठ मे घूमने आया तब उसकी नजर मे यह स्तम्भ आया और इस स्तभ की आकृति उसके मन मे बैठ गई और फिर उसने इस स्तम्भ को मेरठ से उखड़वा कर अपने राजय दिल्ली ले गया और वह इसे स्थापित करवा दिया।

सम्राट अशोक के द्वारा बनाए सभी स्तम्भ की आकृति आपको आज भी किसी अलग राज्य व देश मे देखने को मिल सकती है।

Be the first to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published.


*