दुष्मन को पराजय करने के लिए अपनाये चाणक्य की यह १० निति – Chanakya Niti

chanakya niti dushman
chanakya niti dushman

Chanakya Niti – दोस्तों आज के समय में हर एक व्यक्ति अपने जीवन में सफल होने के लिए बहुत ही कड़ी महनत करता है. इस कड़ी महनत को करके हर व्यक्ति अपने जीवन में पूर्ण रूप से सफल भी बन जाता है. लेकिन इस सफलता के पद पर जब आप कदम रखते है. तब आपके कई सरे दुष्मन भी बनने लगते है. इन दुष्मन को पराजय करने के लिए आपको चाणक्य द्वारा बताये गए chanakya niti dushman का पालन करना पड़ेगा. जिससे आप आसानी से अपने दुष्मन को पराजय करके सफलता के इस रह पर आगे बढ़ सकते है.

चाणक्य दुष्मन निति को बताने वाले महान लेखक कोई और नहीं बल्कि आचार्य चाणक्य है. जिन्होंने अपनी बुद्धि और चतुरता से महाराज धनानंद के नन्द वंश का अन्त कर मौर्य वंश की स्थापना की थी. जिसके बाद पूरी दुनिया उन्हें बहुत ही चतुर और बुद्धिमान मानने लगी. इसी के बाद आचार्य चाणक्य ने अपने हाथो द्वारा एक किताब का लिखी. इस किताब का नाम उन्होंने चाणक्य निति रखा. जिसमे उन्होंने अतीत, वर्तमान , भविष्य के अधार पर कई निति का भी वर्णन किया.

आचार्य चाणक्य ने इस निति का निर्माण वर्तमान और भविष्य में आने वाले सभी लोंगो को सही मार्ग दिखने के उम्मीद से किया था. आज के समय में किसी भी काम को करने से पहले लोंग चाणक्य की Chanakya Niti को जरुर पढ़ते है. ताकि वह अपने उठाये इस कदम में कभी भी पराजय न हो और सफलता की तरह बढ़ते रहे.

चाणक्य दुष्मन निति ( Chanakya Dushman Niti )

आचार्य चाणक्य द्वारा कही Chanakya Niti में इन सभी नीतियों में आपको वह सभी निति भी देखने को मिलेंगी. जो आपको अपने जीवन में पूर्ण रूप से सफल बना देंगी, लेकिन इसके अलावा चाणक्य ने अपने इन सभी नीतियों में सबसे ज्यादा अपने में छुपे दुष्मन को पहचाने और उसे पराजय करने के बारे में वर्णन किया है.

आचार्य चाणक्य ने अपनी Chanakya Niti में अपने दुष्मन को समझने और उसे पराजय करने के बारे में काफी कुछ बताया है. क्योकि आपको यह तो जरुर मालूम होगा की चाणक्य ने भी अपने अपमान का बदला लेने के लिए अपने दुष्मन धनानंद और  नन्द वंश को अपनी चतुराई और बुद्धिमानी से अन्त करके मौर्य वंश की स्थापना की थी.

चाणक्य और धनानंद के दुष्मन की बात करे तो आपको बता दे की पहले आचार्य चाणक्य भी धनानंद के साम्राज्य नन्द वश ने ही कम करते थे लेकिन बाद में उन्होंने धनानंद की चाल ढाल समझ नहीं आई. जिसके बाद आचार्य चाणक्य ने धनानंद के खिलाफ आवाज उठाई. लेकिन नन्द वंश के रजा धनानंद को यह बात पसंद नहीं आई आवर उन्होंने चाणक्य को मरने का आदेश दे दिया. इस बात की खबर किसी तरह चाणक्य को लग गई. जिसके बाद चाणक्य ने तुरंत ही नन्द वंश को छोड़ कर जंगल के तरफ चले गए.

चंदगुप्त को हराने वाले धननंद का इतिहास

जिसके बाद चाणक्य ने कुछ समय जंगल में बिताया और फिर धनानंद के खिलाफ सम्राट अशोक को खड़ा किया. जिसके बाद उन्होंने सम्राट अशोक को नन्द वंश की नीव उखड़ फेकने का संकल्प लिए आवर उसी के बाद सम्राट अशोक ने चाणक्य की मदद से नन्द वश नि नीव को तोड़ कर मौर्य वश की स्थापना की थी. इससे हमें यह प्रतीत हुआ की चाणक्य भी कभी अपने दुष्मन को नहीं छोड़ते थे.

चाणक्य की निति ( Chanakya Niti )

Chanakya Niti – अब हम आपको चाणक्य द्वारा दुष्मन की पराजय के सम्बन्ध ने बताई गई नीतियों में से प्रमुख १० निति को बताने जा रहे, जिसके बाद आप भी अपने दोस्तों में दुष्मन की पहचान और दुष्मन की चाल को पहले ही समझ के उसे पराजय करने के बारे में कुछ प्रमुख बिंदु जान सकेंगे.

Chanakya Niti dushman
Chanakya Niti dushman Image Source – https://navbharattimes.indiatimes.com

प्रथम निति – चाणक्य ने बताया की जब आपका शत्रु आपको किसी भी काम को लेकर उकसाय या फिर आपको कुछ बुरा भला बोले, तब आप उसकी कही बातो पर ज्यादा ध्यान न दे. क्योकि उस समय आप अगर कुछ गलत कदम उठाएंगे या फिर आप अपने शत्रु की कही बातो का जवाब देंगे. तब आपके अन्दर का क्रोध ही आपके शत्रु के लिए एक तोड़ बन जायेगा और आपका शत्रु आपके अन्दर की कमी को पकड़ लेगा. जिसके बाद आपका शत्रु और अधिक मजबूत बन जायेगा.

इस लिए आप अपने शत्रु के कही बातो का जवाब या उस बातो पर किसी भी तरह का कोई रिएक्शन न दे. ताकि आपके शत्रु को यह लगे की आप सही में बहुत ही मजबूत हो. लेकिन आप अपने शत्रु को कभी भी झमा न करे और उसकी कही हर बात को आप अपने मन में याद रखे और सही समय आने पर आप उन सभी बातो का मु तोड़ जवाब दे सके.

उदहारण

दोस्तों अपने कछुआ और हंस के दोस्तों की कहानी तो जरुर ही सुनी होगी, जिसमे एक कछुआ दो हंस के उकसाने की वजह से उनकी बातो में आ गया और उनकी बातो में आकार कछुआ ने अपनी जान भी दे दी. इस कहानी को अगर आप पूरा जानना चाहते हो तो आप निचे इस वीडियो को देख सकते है. इस कहानी को दिखने का मेरा सिर्फ एक मकसद था की आप कभी की किसी के उकसाने की वजह से तुरंत अपना फैसला न ले.

द्वितीय निति – चाणक्य ने बताया की आप अपने शत्रु के साथ भी एक मित्र जैसा व्यव्हार करे, ताकि आप अपने शत्रु की हर एक चीज को बारीक़ से जान कर उसकी चाल को समझ सकते है. इस लिए आप अपने दुष्मन से कभी भी दुष्मनी न करके उनसे मित्रता करो और उनकी हर एक चीज को अनुभव लो. जिसके बाद आप अपने शत्रु को बढ़ी ही असानी से परहस्त कर सकते है.

उदहारण

अपने भारत देश के सीक्रेट टीम RAW का तो नाम जरुर ही सुना होगा, जो अपने देश से बाहर दुष्मन के देश में दुश्मनों के साथ रहकर अपने देश की सेना के लिए ख़ुफ़िया सुराग खोजते है, जब उनको यह सुराग हाथ लग जाता तब RAW और सेना उनके ऊपर हमला करके उनको परहस्त कर देती है.

तृतीय निति – चाणक्य ने अपनी इस निति में बताया की आप कभी भी अपने दुष्मन को घायल करके न छोड़े, क्योकि एक घायल शत्रु को जब बेजान समझ के छोड़ दिया जाता है. तब इसके अन्दर आपसे बदला लेने की इच्छा और अधिक जागरूक हो जाती है. जिसके बाद वह आप पर कभी भी किसी भी समय वार कर आपको भी घायल कर सकता है. इस लिए आप जब भी अपने शत्रु से बदला ले तब आप उसे पूर्ण रूप से ख़तम कर दे. जिसके बाद वह कभी भी आप पर हमला करने के बारे में सोचेंग ही नहीं और आपसे दूर भी रहेगा.

उदाहरण

 आप सभी ने पृथ्वी राज चौहान और महोम्मद गौरी की लड़ाई की कहानी तो जरुर ही सुनी होगी, जिसमें पृथ्वी राज चौहान ने महोम्मद गौरी को युद्ध में लगभग १५ बार माफ़ किया था. जिसके बाद महोम्मद गौरी ने १६ बार इस लड़ाई को जीत लिया और पृथ्वी राज चौहान को बंदी बना लिया था. इस लिए आप कभी भी अपने शत्रु को कमजोर या घायल समझ कर न छोड़े ताकि वह दुबारा फिरसे न उठ खड़ा हो.

चतुर्थ निति  – चाणक्य ने बताया की आप कभी भी अपने शत्रु पर पहला वार न हथियार से न करे, क्योकि जब आप अपने शत्रु पर पहला वार हथियार से बिना जाने समझे करेंगे, तब अपकी पराजय निश्चित है, इस लिए आप अपने शत्रु पर हथियार से वार करने से पहले आप उसे पूर्ण रूप से कमजोर कर दे. अपने शत्रु के सभी संपर्क व् सहयोग को पूर्ण रूप से खत्म करे और जब आपका शत्रु पूर्ण रूप से अकेला हो जाये तब आप उस पर पूर्ण रूप से वार करके उसे पराजय कर दे.

उदहारण

आप सभी ने राज़ी फिल्म तो जरुर ही देखि होगी, जिसमे अभिनेत्री अलिया भट्ट ने एक RAW एजेंट बन कर बांग्लादेश में जाकर वह के पाकिस्तानी कर्नल के युद्ध की की सभी ख़ुफ़िया जानकारी को पाता करके भारत देश को भेजा था, जिसके बाद भारत देश की सेना ने पाकिस्तान की सभी ख़ुफ़िया जानकारी से उनका संपर्क खत्म कर दिया, जिसके बाद सही समय देख कर भारतीय सेना ने बांग्लादेश पर हमला किया और अंजाम भारत को इस युद्ध में विजय प्राप्त हुआ.

पाँचवी निति – चाणक्य ने शत्रु के सम्बन्ध में यह बताया की आप कभी भी अपने शत्रु के अच्छे व्यहवार और उसकी सच्ची मित्रता पर भरोसा न करे. क्योकि एक दुष्ट व्यक्ति व्यव्हार को बदल सकता है. लेकिन अपने आचरण को नहीं वह समय आने पर आपको कभी भी धोका दे सकता है. इस लिए आप कभी भी अपने शत्रु के अच्छे व्यहवार से खुश हो कर उससे दोस्ती न करे. चाणक्य ने इस विषय में यह भी कहा की आप अपने शत्रु के अच्छे व्यवहार को देखते हुए भी आप उससे उसी तरह व्यव्हार करे. जैसे आप अपने बाकि शत्रु से करते है.

उदहारण

दोस्तों अपने दो दोस्तों की कहानी तो जरुर ही सुनी होगी. जिसमे एक एक दोस्त बहुत ही मोटा था और दूसरा दोस्त बहुत पतला था. एक बार दोनों एक जंगल में जा रहे थे. वहा पर उन दोनों दोस्त के रस्ते में भालू मिल गया. दोनों दोस्त खूब घबरा गए. लेकिन एक पतला दोस्त बहुत चालक था. उसने देखा की जब भालू पास a रहा तब वह अपने मोटे दोस्त को धोका देकर एक पेड़ पर चढ़ गया.

लेकिन दूसरा दोस्त थोडा मोटा था, इस वजह से वह पेड़ पर चढ़ न पाया. लेकिन वह बहुत ही बुद्धिमान था, उसने देखा की जब भालू पास अ रहा तब वह अपनी साँस रोक कर वही सो गया. उसके बाद वह पर भालू आया आवर उसने उस दोस्त के मु को सुंघा आवर उसे मारा समझ के वह से चला गया. जिसमे बाद पेड़ पर चढ़ा दोस्त निचे उतरा और उसके बाद दोनों मित्र में बहुत बहेस हुई और फिर मोटे दोस्त ने अपने पतले दोस्त से धोकेबाज बोल कर मित्रता थोड दी.

छठी निति – चाणक्य ने यह भी कहा की आप जब किसी काम की सुरुवात करते है तब आपको एक शत्रु की जरुरत होती है. क्योकि एक शत्रु ही आपको उस काम में असल सफलता दिलवा देगा. क्योकि जब आप अपने काम की सुरुवात करेंगे तब अगर आपका कोई विपाझी भी उस काम की सुरुवात करेगा. तब आप अपने विपझी की सफलता से पहले सफलता पाने के लिए आप बहुत ही जल्दी काम करेंगे जो आपके बहुत ही जल्दी सफलता दिलवा देगी.

उदहारण

दोस्तों अपने कई बार एक कहानी भी सुनी होगी की दो दोस्त एक साथ काम करने गए, जहा पर एक दोस्त को दुसरे दोस्त से पहले सफलता मिल गई और इस सफलता को देख कर दूसरा दोस्त बहुत नाराज हुआ. इसके बाद दुसरे दोस्त ने अपना काम निराशा के साथ वही छोड़ दिया और बिना सफलता प्राप्त किये वहा से चला गया.

सातवी निति – चाणक्य ने बताया की आप अगर अपने जीवन में सफल बनना चाहते हो तो आप अपने बुरे , दुष्ट  और गलत कम करने वाले व्यक्ति से हमेसा दूर रहना चाहिए. क्योकि एक अगर आप उन बुरे व्यक्ति की सांगत में रहोगे तो आप भी बुरे बन जाओगे और आपका आचरण भी अपने बुरे दोस्त की तरह हो जायेगा.

उदहारण

दोस्तों अपने एक बुरी मछली की कहानी तो जरुर ही सुनी होगी. जो गलती से एक साफ तलब में अ जाती आवर फिर उस तलब में रहने वाली सभी मछली और तालाब दोनों को पूरी तरह से गदा कर देती है. आप इस कहानी को निचे देख भी सकते है.

आठवी निति – चाणक्य ने Chanakya Niti में शत्रु के सम्बन्ध में यह बताया की आप अपने शत्रु को कभी भी कम न आके. क्योकि आपका शत्रु कब कमजोर से बलवान बन जाये इसके बारे में कुछ कह नहीं सकते है. इस लिए आप अपने शत्रु की हर एक गतिविधि को बारीकी से समझे और उसे जानने की कोशिस भी करे. ताकि जब आपका शत्रु आप पर हमला करने का सोचे तब आप उसका मुह तोड़ जवाब दे कर उसे युद्ध में परहस्त कर सके.

उदहारण

पहले के समय ने राजा – महाराजा युद्ध को जितने के लिए अपने कुछ गुप्त्सुचर को अपने दुष्मन की सेना में भीज देते है, ताकि वह दुष्मन की हर गति विधि का समाचार युद्ध से पहले दे सके.  इसी वजह से कई देश ने अपने युद्ध में विजय प्राप्त की थी.

chanakya niti

नौवी निति – चाणक्य ने बताया की अगर आपके बुरे वक्त पर आपके ख़ास दोस्त मदत न आये तो आप यह समझ लेना की आपके सभी दोस्त केवल आपसे टाइम पास कर रहे है, क्योकि एक सच्चा दोस्त अपकी हर परिस्थति में अपकी मदद करेगा आवर आपके बुरे समय में भी आपके साथ अपकी मदद करने के लिए रहेगा.

उदहारण

दोस्तों अपने दोस्ती मूवी तो जरुर ही देखी होगी. जिसमे बौबी देवल ने किस तरह से अपने सबसे सच्चे दोस्त अक्षय कुमार की  तरह से मदद करके उसे कहा से कहा तक ले आता है. इसके बाद वह अपने दोस्त की हर एक चीज में मदद भी करता है. यह सब आप इस विडियो में देख सकते है.

दसवी निति – चाणक्य ने Chanakya Niti में बताया की जब आपका सच्चा मित्र आपके घर किसी की मृत्यु में न आये. तब आप यह समझ लेना की आप आपका वह मित्र आपके बुरे समय में कभी भी मदद नहीं करेगा. इस लिए आप इन दोस्तों से तुरंत ही दोस्ती तोड़ दे, क्योकि ऐसे व्यक्ति केवल आपके पैसे से प्यार करता है न की अपकी मित्रता से.

सिक्खों के धर्म गुरु गोबिंद सिंह जी की जीवनी

उदहारण

आप सब ने तिन चिडिया की कहानी तो जरुर ही सुनी होगी. जिसमे एक चिड़िया ने रोटी बनाने के लिए अट्टा पिसने का बाकि चिडियों के सामने प्रस्ताव रखा. लेकिन बाकि दोनों चिड़िया ने  बहाना बनाना सुरु किया. जिसके बाद चिड़िया ने खुद ही अट्टा पिसाया और रोटी भी बनाई. जिसके बाद बाकि दोनों चिड़िया भी पकी रोटी खाने अ गई. लेकिन उस चिड़िया ने रोटी देने से मना कर दिया और अकेले ही अपने महनत की रोटी खाई थी. इस कहानी को आप निचे देख सकते है.

Conclusion

दोस्तों आज की इस पोस्ट में हमने आपको chanakya niti dushman के कुल १० निति के बारे में उदहारण के साथ बताया है. अब अगर आप भी अपने शत्रु पर विजय पाना चाहते है. तो आप भी इन निति को पढ़ सकते है. जिसके बाद आप अपने शत्रु पर आसानी से विजय प्राप्त करने का ज्ञान भी प् सकते है.

अब अगर आपको यह पोस्ट अच्छी लगी हो तो आप इसे अपने दोस्तों में शेअर जरुर कर. ताकि आपका सच्चा मित्र भी चाणक्य की इन नीतियों से अपने आप को सजक कर सके और अपने जवान में सफल बन सके.

1 Comment

Leave a Reply

Your email address will not be published.


*