सिक्खों के धर्म गुरु गोबिंद सिंह जी की जीवनी – Guru Gobind Singh biography

Guru Gobind Singh
Guru Gobind Singh

चिड़ियो से मै बाज लड़ाऊ , गीदड़ो को मै शेर बनाऊ !

सवा लाख से एक लड़ाऊ , तब गोबिन्द सिंह नाम कहाऊ !!

Guru gobind Singh जी की कहावत को तो आप सब ने जरूर ही सुना होगा। लेकिन क्या आप इससे पहले यह जानते थे की इस कहावत को कहने वाले व्यक्ति का नाम क्या है। अगर आप नहीं जानते तो आप आज इस पोस्ट को पढे ताकि आप इस कहावत को कहने वाले गुरु गोबिन्द सिंह जी के जीवन परिचय और उनकी वीरता की कहानी को जान सके।

सिक्ख भाइयो के 9 वे धार्मिक गुरु के रूप मे प्रसिद्ध गुरु गोबिन्द सिंह जी का जन्म 5 जनवरी 1666 मे पटना साहिब मे हुआ था। बचपन से ही guru gobind singh जी बहुत ही बुद्धिमान और निडर स्वभाव के थे। इसी के चलते वह 9 बर्ष की आयु मे ही सिक्खो के नेता और अपने पिता के उत्तराधिकारी भी बने।

गुरु गोबिन्द सिंह जी बहुत ही सरल स्वभाव के व्यक्ति थे। वह हमेसा आपकी प्रजा को आपस मे मिल जुल कर रहने और दूसरे से अच्छा व्यवहार करने के निर्देश दिया करते थे। इसी के चलते उन्होने समाज और प्रजा मे हो रहे अत्याचारो और अपराधो का विरोध किया और इसी बाद उन्होने खालसा पंथ की स्थापना भी की थी।

Table of Contents

गुरु गोबिन्द सिंह का जीवन परिचय – Guru Gobind Singh History

                    नाम             गुरु गोबिन्द सिंह
          बचपन का नाम             गोबिन्द राय सोधी
                   जन्म         5 जनवरी 1666 ( पटना साहिब )
            पिता का नाम               गुरु तेग बहादुर
            माता का नाम                  गुजरी
            पत्नी का नाम   माता जीतो , माता साहिब देवन , माता सुंदरी
            बच्चो का नाम जुझार सिंह , फतेह सिंह , जोरावर सिंह , अजित सिंह
                  म्रत्यु      7 अक्टूबर 1708  ( हजूर साहिब नांदेड़ )

गुरु गोबिन्द सिंह जी का जन्म 5 जनवरी 1666 ई॰ को पटना मे गुरु तेग बहादुर सिंह के यहा हुआ था। इनके पिता गुरु तेग बहादुर सिंह सिक्खो के 9 वे धार्मिक गुरु थे। लेकिन अपने पुत्र के जन्म के समय वह असम राज्य मे धर्म उपदेश के लिए गए हुये थे।

गुरु गोबिन्द सिंह जी ने अपने बचपन के चार साल अपने जन्म स्थान पटना मे ही बिताए. इसके बाद वह अपने परिवार के साथ 1670 ई॰ मे पंजाब आ गए थे. आज के समय मे सभी सिक्ख भाई पटना मे स्थित “ तख्त श्री पटना हरीमंदर साहिब “ जी के दर्शन के लिए जाते है। वह गुरु गोबिन्द सिंह जी का जन्म स्थान ही था।

लेकिन 1672 ई॰ मे इनके पिता ने पंजाब से भी पलायन ले लिए और फिर उनका परिवार हिमालय मे शिवालिका पहाड़ी मे स्थित चक्का नानकी स्थान पर रहने लगा। आज के समय मे इस चक्का नानकी स्थान को “ आनंदपुर साहिब “ के नाम से जाना जाता है। कई इतिहासकारो का यह मानना की इस स्थान की स्थापना इनके पिता गुरु तेग बहदुर सिंह जी ने की थी।

Guru Gobind Singh
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Image Source – https://www.indiatvnews.com

गुरु गोबिन्द सिंह जी ने इसी स्थान पर अपनी पढ़ाई को सुरू किया। इस स्थान पर ही गोबिन्द राय ने हिन्दी , संस्कृत , फारसी और युद्ध मे चलाने वाले हथियार , निडरता आदि सभी चीज का ज्ञान यही पर लिया। जब गोबिन्द राय बड़े हुए तब उन्होने उसी स्थान पर एक अध्यापक के तरह सभी लोंगों को ज्ञान बता और उन्हे निडर , निर्भीक , खुले विचारो का बनाया।

जब गुरु गोबिन्द सिंह की भी व्यक्ति को ज्ञान देते थे। तब वह यह नहीं देखते थे की वह व्यक्ति छोटी जात , रंग , बुरा ,आदि का है. बस वह उस व्यक्ति की भूल को झमा करके उसे  अपने साथ रख कर अनमोल वचन के पाठ सुनते थे। इसी के चलते वह अपने पिता के उत्तराधिकारी और सिक्खो के 9 वे नेता भी बने।

सिक्खो के 10 वे धर्म गुरु की कहानी

जब औरंगजेब द्वारा कश्मीरी पंडित को जबरन इस्लाम मे परिवर्तन किया जा रहा था। तब इनके पिता गुरु तेग बहादुर सिंह सभी कश्मीरी भाइयो की समस्या को लेकर औरंगजेब के पास गए और अपनी समस्या को सुनाया। लेकिन औरंगजेब ने उनकी एक न सुनी और उनका सर दिल्ली के चाँदनी चौक मे सार्वजनिक स्थान पर कटवा दिया। इसी के बाद गुरु गोबिन्द सिंह को 29 मार्च 1676 ई ॰ मे बैशाखी के दिन 10 वां धर्म गुरु घोषित किए गए।

लेकिन इसके बाद भी गुरु गोबिन्द सिंह ने अपनी पढ़ाई नहीं छोड़ी, बल्कि उन्होने इसी के साथ अपने प्रजा की रझा के लिए अस्त्र – शस्त्र , तीर चलन , तलवार चलना , घोड़ो की सवारी आदि कर चीजों को सीखा। इसी के साथ उन्होने 1684 मे एक पुस्तक “ चंडी दी वार “ की भी रचना किए।

गुरु गोबिन्द सिंह का विवाह – Guru Gobind Singh Marriage

 गुरु गोबिन्द सिंह जी का तीन बार विवाह हुआ था।

प्रथम विवाह – गुरु गोबिन्द सिंह का प्रथम विवाह 21 जून 1677 ई॰  मे आनंदपुर से 10 किलोमीटर की दूरी पर बसंतगढ़ नमक जगह पर माता जीतो के साथ हुआ था। इस पत्नी से गुरु गोबिन्द सिंह जी को तीन पुत्रो की प्राप्ति हुई जिनके नाम – जुझार सिंह , जोरावर सिंह , फतेह सिंह था।

दूसरा विवाह – गुरु गोबिन्द सिंह का दूसरा विवाह 4 अप्रैल 1684 ई॰ मे माता सुंदरी के साथ आनंदपुर मे हुआ था। तब इनकी आयु लगभग 17 बर्ष के करीब थी। इस पत्नी से इनको एक पुत्र की प्राप्ति हुई जिसका नाम अजित सिंह था।

तीसरा विवाह – गुरु गोबिन्द सिंह का तीसरा विवाह 15 अप्रैल 1700 ई॰ मे लगभग 33 बर्ष की आयु मे माता साहिब कौर के साथ हुआ था। इन पत्नी से गोबिन्द जी को कोई भी संतान नहीं थी लेकिन इतिहास के पन्नो मे इनके समय का दौर बहुत ही प्रभावशाली देखने को मिला।

गुरु गोबिन्द सिंह जी के पुत्र  – Guru Gobind Singh Children’s

गुरु गोबिन्द सिंह के 4 पुत्र थे और उनके नाम कुछ इस तरह थे।

गुरु गोबिन्द सिंह का खालसा पंथ                                   

गुरु गोबिन्द सिंह ने लोंगों के ऊपर हो रहे अत्याचारो और अन्याय के खिलाफ आवाज उठाई और अपनी प्रजा की रझा के  लिए एक मजबूत सेना का निर्माण किया। इसी सब बातों को ध्यान मे रखते हुये गुरु गोबिन्द जी ने 1699 मे बैशाखी के दिन खालसा पंथ की स्थापना की थी।

सिक्ख धर्म मे विधिवत दिझा प्राप्त अनुयायियों के समूह को ही खालसा कहा जाता है। गुरु गोबिन्द सिंह जी ने बैशाखी के दिन अपने सभी अनुयायियों के लिए पानी और पंजाबी मिठाई ( पीतश ) का मिश्रण करके एक मीठा पानी बनया और इस मीठा पानी को ही “ अमृत “ नाम दिया।

guru granth sahib
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Image Source – http://www.ywfyouthvoice.com

जब गुरु गोबिन्द जी ने अपना अमृत तैयार कर लिया। तब उन्होने आनंदपुर मे इकट्ठा सभी अनुयायियों से एक सवाल किया की जो भी स्वयंसेवक खलशा से जुड़ना चाहता है। उन सभी स्वयंसेवक को अपने सिर का बलिदान देना पड़ेगा और तभी सभी स्वयंसेवक मे से 5 स्वयंसेवक बाहर आए। यह सभी स्वयंसेवक अपनी इच्छा से खालसा मे जुड़े थे।

जिसके बाद गुरु गोबिन्द जी ने सभी 5 स्वयंसेवक को अमृत दिया और खुद भी इस पावन अमृत जल को ग्रहण किया। अमृत को ग्रहण करने के बाद गुरु गोबिन्द राय ने अपना नाम भी बदलकर गुरु गोबिन्द सिंह रख लिया था।

इस सब के बाद सभी खालशा के स्वयंसेवक बपतिस्मा सीख हो गए और अब इन सभी स्वयंसेवक को खालशा पंथ के सिद्धांतों के साथ ही रहना था। यह सभी सिद्धांथ खुद गुरु गोबिन्द सिंह जी ने बनाए थे और कई लोंग इन सभी सिद्धांथों को 5 ककार के नाम से जानते थे।

गुरु गोबिन्द सिंह द्वारा बपतिस्मा सीखो के लिए सिद्धांथ

  • कंघा – गुरु गोबिन्द जी ने कंघा के साफ – सफाई एवं स्वच्छता का प्रतीक कहा है।
  • कारा – गोबिन्द जी ने सभी लोंगों को हाथ मे कंगन पहने का निर्देश दिया।
  • कचेरा – गोबिन्द जी ने सभी को लोंगों को पैर के गुठने तक वस्त्र पहने का आदेश दिया।
  • केश – गोबिन्द जी ने बपतिस्मा के सिक्खो को बाल न काटने का भी कहा है।
  • क्रपाण – गोबिन्द जी ने सभी को अपने पास एक धातु का छोटा अस्त्र हमेशा साथ मे रखने को कहा है।

गुरु गोबिन्द सिंह द्वारा लडे गए  युद्ध

गुरु गोबिन्द सिंह बचपन से ही निडर व निर्भीक किसम के व्यक्ति थे। वह कभी भी युद्ध करने से घबराते नहीं थे। इसी के चलते उन्होने मुगलो सैनिक द्वारा लोंगों पर हो रहे अत्याचार को सुधारने के लिए अपनी एक सेना तैयार की और यह सेना पूरी तरह खालशा पंथ से जागरूक थी।

गुरु गोबिन्द सिंह ने मुगलो के साथ कई युद्ध किए। लेकिन इतिहास के पन्नो मे आपको केवल 14 युद्ध के बारे मे ही पढ़ने को मिलेगा। इन सभी युद्धो मे गोबिन्द जी ने अपने परिवार और अपने सैनिको को भी खोया, लेकिन इसके बावजूद उन्होने युद्ध से कभी भी विराम नहीं लिया और हमेशा मजबूती के साथ युद्ध करते रहे।

इतिहास के पन्नो मे मिली 14 युद्ध कुछ इस प्रकार है।

युद्ध का नाम युद्ध का समय
                भंगानी का युद्ध                  1688
नंदौन का युद्ध 1691
गुलेर का युद्ध 1696
          आनंदपुर का पहला युद्ध 1700
निमौर्हगंढ का युद्ध 1702
बसौली का युद्ध 1702
चमकौरा का युद्ध 1704
             आनंदपुर का युद्ध  1704
सरसा का युद्ध 1704
मुक्तसर का युद्ध 1705
   
   

गुरु गोबिन्द सिंह द्वार लिखी पुस्तक

गुरु गोबिन्द सिंह एक योद्धा के साथ एक अच्छे ज्ञानी व्यक्ति भी थे। उनको अपने सभी ग्रंथो का भरपूर ज्ञान था। इसी के चलते उन्होने लोंगों को सभी लोंगों को अपने अनमोल वचन से भी मार्ग दिखाया। लेकिन गोबिन्द जी ने अपने अनमोल वचन को सभी तक पाहुचने के लिए कई अलग – अलग पुस्तक भी लिखी थी।

यह सभी पुस्तक कुछ इस प्रकार है।

  • चंडी दी वार
  • जाप साहिब
  • खालशा महिमा
  • अकाल उस्तात
  • बचित्र नाटक
  • जफरनामा

गुरु गोबिन्द सिंह के अनमोल कदम

गुरु गोबिन्द सिंह द्वारा उठाए गए कुछ अनमोल कदम इस प्रकार है।

  • गुरु गोबिन्द सिंह ने अपने से बढ़े और महान गुरु के उपदेशो को सिक्खो केआर पवित्र ग्रंथ ‘ गुरु ग्रंथ साहिब ‘ मे सामील करके अपने ग्रंथ को पूरा किया।
  • गोबिन्द जी ने सभी सिक्ख भाइयो को अपने नाम के आगे सिंह लिखने को कहा, जो प्रथा आज भी चलाई जा रही है।
  • गोबिन्द जी ने ही गुरुओ के उत्तराधिकारी की परंपरा को खतम कर सभी लोंग के लिए गुरु ग्रंथ साहिब की रचना की और उसे गुरुओ का प्रतीक भी माना था।
  • गोबिन्द सिंह ने मुगलो के अत्याचारो को खतम करने के लिए 1669 मे खालशा पंथ की स्थापना की थी।
  • गोबिन्द जी ने खालसा पंथ के अधीन सभी स्वयंसेवक को 5 निर्देश दिये थे, इन सभी निर्देशों के हिसाब से सभी सैनिक पूर्ण रूप से कभी भी युद्ध के लिए तैयार रहते है।

गुरु गोबिन्द सिंह की मृत्यु – Guru Gobind Singh Jayanti

गुरु गोबिन्द सिंह जी की मृत्यु के पीछे मुगल शासको का हाथ था। कहा जाता की जब मुगल बादशाह औरंगजेब की मृत्यु हुई तब उसका बेटा बहादुर शाह जफर ने मुगलो की गद्दी संभली लेकिन बहादुर शाह जफर को मुगलो का राजा बनाने ने गुरु गोबिन्द सिंह ने खूब मादा की थी। इसी के चलते बहादुर शाह जफर औए गुर गोबिन्द सिंह मे काफी मित्रता भी हो गई।

बस यही बात सरहद पर बैठे नवाब वजीद खा को पसंद नहीं आई और इसी के बाद उसने guru gobind singh को मरने के लिए दो पठानों को भेजा, इसी के साथ 7 अक्टूबर 1708 मे गुरु गोबिन्द सिंह ने महारास्ट्र  मे अपनी अंतिम सांस लेकर इस दुनिया को अलविदा कह दिया।

आज भी सभी सिक्ख भाई गुरु गोबिन्द सिंह के जन्म को बड़ी ही धूम – धाम से मानते और फिर उस दिन गुरुद्वारा मे जा कर गुरबानी के साथ गोबिन्द साहब की शांति के लिए भजन – कीर्तन भी करते है। इस दिन को सभी सीख भाई Guru Gobind Singh Jayanti 2019 के नाम से जानते है।

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गुरु गोबिन्द सिंह के जीवन पर प्रकाश

  • Guru Gobind Singh ji का जन्म हर साल 16 जनवरी को मनाया जाता है, इसके अलावा गुरु गोबिन्द जी के जन्म को लेकर इतिहासकारो के अलग – अलग मत भी है।
  • गुरु गोबिन्द सिंह के बचपन का नाम गोबिन्द राय था लेकिन बाद मे अपने पिता के मृत्यु के बाद इंका नाम गुरु गोबिन्द राय और खालसा पंथ की स्थापना के बाद इंका नाम गुरु गोबिन्द सिंह ही गया।
  • गुरु गोबिन्द सिंह बचपन से ही बड़े निडर और निरफिक स्वभाव के थे और बड़े होने पर उनके अंदर यह चीज और भी ज्यादा देखने को मिली। जब वह हमेशा युद्ध के लिए तैयार रहते थे।
  • गुरु गोबिन्द सिंह ने भीम चंद से हाथापाई होने के कारण आनंदपुर को छोड़ा था। जिसके बाद वह आनंदपुर से हिमाचल प्रदेश के नहान नमक स्थान पर चले गए थे।
  • आज पंजाब का रूपनगर जिला ही गुरु गोबिन्द सिंह का निवास स्थान आनंदपुर था।
  • 1688 मे गुरु गोबिन्द सिंह ने भीम चंद , गर्वल राजा , फतेह खान एवं अन्य सीवलिका पहाड़ के राजा से युद्ध किया। इस युद्ध मे दोनों ही तरफ के कभी युद्ध की जान चली गई और उसी बाद गोबिन्द जी की विजय हुई इस युद्ध मे।
  • इस युद्ध के बाद ही 1688 मे गोबिन्द जी आनंदपुर वापस आ गए।
  • 1699 मे गुरु गोबिन्द जी ने अपने सभी स्वयंसेवक के लिए को इकट्ठा करके खालशा बाणी की स्थापना की थी।
  • गुरु गोबिन्द सिंह ने गुरु ग्रंथ को पूरा करने के वजह से सभी सिक्ख भाई ने इन्हे गुरु ग्रंथ साहिब की उपाधि दी थी।
  • गुरु गोबिन्द सिंह जी की खलसी बाणी कुछ इस तरह है

गुरु गोबिंद सिंह की सिखाई बाते

Guru gobind singh ने आने वाली पीढ़ी को जीवन में सफल बनने के कुछ बाते कही थी.  इन सभी बातो को अगर आने वाली पीढ़ी अपने मन में बसा ले तो यह सत्य है की आगे आने वाली पीढ़ी अपने जीवन में सफल हो कर निखरेगी.

guru gobind singh
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गुरु गोबिंद सिंह द्वारा नव युवको के लिए कही गई कुछ बाते

  • किसी भी काम को पूर्ण ईमानदारी से करे.
  • अपने पैसे का कुछ प्रतिशत भाग गरीब में दान करे.
  • गुरबानी को अपने कंठ में पूर्ण रूप से स्थापित कर ले.
  • अपनी जवानी , पैसे आदि चीज पर कभी घमंड न करे.
  • किसी भी काम को लापरवाही से ना करे.
  • किसी भी लाचार , दुखी , परेशान व्यक्ति की मदद जरुर करे.
  • अपने वादों पर खरा उतरने की कोसिस करे.
  • नशा व बुरी आदतों से अपने आप को सावधानी बरते.

गुरु गोबिंद सिंह से जुड़े सवाल – जवाब

सवाल – Who was Guru Gobind Singh Wife?

जवाब – गुरु गोबिंद सिंह जी की तीन पत्नी थी.

  • माता जीतो
  • माता सुंदरी
  • माता साहिब दीवान

सवाल –  When did Guru Gobind Singh Died?

जवाब – गुरु गोबिंद सिंह जी की हत्या उनके दुश्मनों ने चोरी चुपे से 7 अक्टूबर 1907 में मुंबई में कर दी गई थी.

सवाल – Why was Guru Gobind Singh the last Guru?

जवाब – गुरु गोबिंद सिंह जी सभी सिक्खों के १० वे धर्म गुरु थे. लेकिन उसी के बाद उन्होंने गुरु ग्रन्थ साहिब पुस्तक का निर्माण कर दिया, जिसके बाद उन्होंने कहा की आब आगे कोई गुरु नहीं बनेगा आवर जितने भी आगे आने वाले सिख भाई होंगे वो अब केवल इसी ग्रन्थ से अपना मार्ग दर्शन करेंगे.

सवाल – Who was Guru Gobind Singh Wife?

जवाब – गुरु गोबिंद सिंह जी की कुल तिन पत्नी थी. जिनका नाम आपको हमारे पहले सवाल में मिल जायेगा.                     

गुरु गोविन्द सिंह जी की खालशा वाणी

                                      “ वाहे गुरु जी द खालसा, वाहे गुरु जी दी फतेह “

Conclusion

दोस्तों आज के इस पोस्ट में हमने Guru Gobind Singh biography के बारे में जाना है. अब अगर आपको Guru Gobind Singh के बारे में जानना हो तो आप हमरी इस पोस्ट को पढ़ सकते है. इसके अलावा अगर आपको किसी Rameshwaram Temple और Ashok Stambh history in hindi के बारे में जानना हो तो आप हमरी इस पोस्ट को पढ़ सकते हो.

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