lucknow ki bhool bhulaiya – नवाबो की शान लखनऊ की भूल भुलैया

lucknow ki bhool bhulaiya
lucknow ki bhool bhulaiya

दोस्तो आज की इस पोस्ट मे हम आपको लखनऊ की शान lucknow ki bhool bhulaiya के बारे मे बताने जा रहे, क्योकि अपने लखनऊ और लखनऊ की शान bhool bhulaiyaa के बारे मे तो खूब सुना होगा पर अपने कभी इसके इतिहास को और इसकी खूबी को पास से नहीं देखा होगा इस कारण हम आज आपको bhool bhulaiya के बारे मे बताने जा रहे है।

लेकिन bhool bhulaiya के बारे मे जानने से पहले हम यह जानना चाहेंगे की अपमे से कितने लोंग lucknow ki bhool bhulaiya को घूम चुके है, क्योकि जो लोंग घूम चुके वह बहुत ही भाग्य शाली होंगे और उन्हे घूमना बहुत अच्छा लगता होगा।

 लेकिन अपमे से ही कुछ लोंग ऐसे भी होंगे  जिन्होने आज से पहले city of nawabs मतलब Lucknow के और lucknow history की सबसे पुरानी चीज bhool bhulaiya जिसको कुछ लोंग bara imambara के नाम से भी जानते है, उसके बारे मे आज से पहले कभी नहीं सुना होगा।

पर अब नहीं क्योकि अब हम आपको इस bhool bhulaiya के बारे मे बताने जा रहे जो की historical places in lucknow के नाम से भी जानी जाती और इसी के साथ हम आपको यह भी बताने जा रहे की इसे कब और किसने बनवाया था।

भूल भुलैया का इतिहास ( lucknow ki bhool bhulaiya )

दोस्तो भूल भुलैया का इतिहास बहुत ही पुराना होने के कारण हमे इसे जानने के लिए आज से 235 ई पु बर्ष 1784 मे जानना पड़ेगा क्योकि भूल भुलैया का निर्माण 1784 मे लखनऊ अवध के नवाब आसफउद्दौला ने कराया था।

भूल भुलैया को बनवाने का मकसद था गरीब लोंगों को काम देना क्योकि 1784 मे एक बार लखनऊ मे बहुत ज्यादा अंकली हो गई और सभी अवध के नागरिक दो वक्त की रोटी के लिए मुहताज होने लगे।

जब सभी के पास खाने को कुछ न बचा तब सभी नगर के नागरिक इक्कठा होकर नवाब साहब के पास गए और अपने इस्थती के बारे मे बाते तब नवाब साहब ने उनकी मदद करने के बारे मे अपने वजीरो को सोचने के लिए कहा था।

lucknow ki bhool bhulaiya
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लेकिन तभी सभी वजीरो ने नवाब साहब को यह राय दी की आप अपने शाही खज़ानो मे से कुछ रुपेय इन गरीबो को बात दे लेकिन तभी नवाब साहब अपने स्थान से खड़े होकर बोले की अगर मै इन लोंगों को ऐसे ही पैसे दे दूंगा तब इनकी आदत बैठ कर हराम का खाने की हो जाएगी।

लेकिन इसी बात को सोचते हुए नवाब साहब ने यह हल निकाला की अगर हम एक बड़ा महल बनवाए तो मेरा महल का महल भी बन कर तैयार हो जाएगा और इन नगर वासियो को दो वक्त के खाने के कुछ रुपेय भी मिल जाएंगे।

इसी को देखते हुए नवाब साहब ने bhool bhulaiya को बनवाने का सोचा लेकिन भूल भुलैया को बनवाने से पहले उन्होने एक उसका नक्शा बनवाने का सोचा इस लिए उन्होने एक मुक़ाबला करवाया और इस मुक़ाबले को दिल्ली के वास्तुकार कफ़ायत उल्लाह ने जीता कर इस महल को 14 साल मे बनाने का संकल्प लिया।

जब bhool bhulaiya का निर्माण हो रहा था तब इस महल मे काम करने के लिए पूरे नगर के सभी नागरिक आया करते थे, लेकिन काम कम होने के कारण और नगर के नागरिकों के पैसे की समस्या का हल निकालने के लिए नवाब साहब रात मे उन्ही मजदूर से दीवाल बनवाते थे और रात मे उसे सिपाहियो से गिरवा देते थे।

भूल भुलैया की खासियत

अभी अपने खाली यह जाना की lucknow ki bhool bhulaiya का निर्माण गरीबो को काम और उनके पैसे की पूर्ति के लिए कराया गया था लेकिन एक बात सोचो की जब महल बन कर तैयार हो रहा तो इसमे कुछ तो खास बात होगी तभी तो यह आज तक bhool bhulaiya lucknow की शान बन कर खड़ा है।

दीवारों के कान

 आप मे से कुछ लोंग ने सायद आज से पहले यह जरूर सुना होगा की दीवारों के भी काम होते है लेकिन इस बात की सच्चाई क्या किसी को नहीं मालूम होगा क्योकि अपने उसके बारे मे जानने की कोसिस नहीं की कभी भी।

दीवारों के भी कान होते तह कहावत इसी भूल भुलैया से ली गई थी क्योकि इस भूल भुलैया के दीवारों के भी कान थे जो हमेशा बोला करती थी, आप के घर की दीवार बोलती है।

अब जानो की यह दीवार क्यो बोलती थी क्योकि इस भूल भुलैया की दीवारों का निर्माण बालू , सीमेंट और सरिया से नहीं बल्कि ऊरद , चने की दाल , सिंघाड़े का अट्टा , गाने का रस , गोंद , अंडे की चर्बी , इत्र , आदि छीजो से मिल कर बनी हुई है।

इसी कारण भूल भुलैया की दीवार मे आर – पार की बात बिलकुल साफ से सुनाई देंगी आपको बता दे की इस चीज का निर्माण कलाकारो ने यह सोच कर बनाया था की कोई भी किसी भी तरह की बात को सुन कर कोई सरयन्त्र न बना सके।

lucknow ki bhool bhulaiya
lucknow ki bhool bhulaiya

Image Source — https://www.sid-thewanderer.com/

बिना खम्बे की छत

अगर आपमे से कोई भी भूल भुलैया गया हो तो आप यह याद करो को जब आप bhul bhulaiya के अंदर उसके दरबार मे गए तब आपको वह पर एक भी खम्बे ( पिलर ) देखने को मिला था नहीं मिला होगा क्योकि भूल भुलैया की छत बिना खम्बे की है।

अब आप यह जानो की इसकी छत क्यो बिना खंबे की बनी और आज तक यह कैसे खड़ी है इन सभी सवालो का जवाब आपको अभी मिलेगा लेकिन उससे पहले आप यह सोचो की अपने कभी किसी सपोर्ट के कोई छत और उसके ऊपर गुंबद देखा है।

बात करे छत की तो लखनऊ के नवाब का यह कहना था की हमे एक सभा के लिए बड़ा सा कमरा चाइए और इस कमरे मे किसी भी प्रकार का कोई खम्बा नहीं चाइए तब सभी निर्माण करो ने यह कहा की नवाब यह तो मुमकिन नहीं है।

इसी चीज को सोचते – सोचते सभी इंजिनर को 7 दिन लग गए और 7 दिन के बाद उन्होने यह निर्णय निकाला की वह छत की दीवारों पर कई सारे दरवाजे बना देंगे ताकि इस छत और दीवार का वजन कम हो जाए और बिना खम्बे की दीवार बन जाए।

हर मोड के तीन दरवाजे

भूल भुलाया को भूल भुलाया क्यो नाम दिया गया क्या आपको पता है, नहीं पता तो सुनिए की इस भूल भुलैया मे आपको किसी भी जगह और किसी भी मोड मे जाने के लिए तीन दरवाजे मिलेंगे और इन दरवाजो मे से एक दरवाजा आपको सही जगह ले जाए और बाकी के दो दरवाजे की दिशा बदलवा देंगे।

पुराने समय मे नवाबो ने इसे यह सोच कर बनवाया था की अगर कोई नया दुश्मन इस महल मे घुसेगा तो वह अपने मंजिल मे कामयाब नहीं हो पाएगा और पकड़ा जाएगा इस कारण इसका निर्माण ऐसे किया गया।

उल्टे – पुलटे चढ़ने वाले सीढ़ी 

अब आप एक बात बताओ की अगर आप किसी सीढ़ी को पकड़ कर ऊपर जाएंगे तब आप ऊपर ही पाहुचेंगे न लेकिन इस lucknow ki bhool bhulaiya मे ऐसा नहीं है, वंहा पर जब आप सीढ़ी पकड़ कर ऊपर की तरफ चढ़ेंगे तब आप ऊपर नहीं बल्कि नीचे की तरफ चले जाएंगे।

इसी कारणो के वजह से इसे भूल भुलैया का नाम दिया गया ताकि इसमे अगर कोई नया व्यक्ति आए तो वह इसमे खो ही जाए और अपना मार्ग से भटक जाए।

भूल भुलैया का रहस्य

आप मे से कितने लोंग भूल भुलैया के रहस्य के बारे मे जानते हो क्योकि इस bhul bhulaiya lucknow मे आपको कई रहस्य सुनने को मिले होंगे लेकिन यह सभी रहस्य आपको कभी देखने को नहीं मिल सकते है।

भूल भुलैया का खजाना

भूल भुलैया मे माना जाता की पहले के नवाब के पास बहुत पैसे होते थे लेकिन इन सभी खज़ानो की खबर अंग्रेज़ो को लग गई जिसके बाद अंग्रेज़ो ने बिना समय को बर्बाद किए हुये भूल भुलैया पर आक्रमण कर दिया।

लेकिन जब आक्रमण की खबर नवाब को लगी तो वो अपने स्थान से जरा सा नहीं हिले लेकिन इनके वजीर ने चालाकी दिखा कर खजाना और खजाना का नक्शा लेकर वहा से भाग कर पास के कुंवा जिसको हम सही बावड़ी के नान से जानते है।

उसी मे वजीर ने अपने साथ खजाने की चाभी और खजाने तक पहुचने का नक्शा लेकर उस बावड़ी मे छलांग लगा दी जिसके बाद उस वजीर का कोई भी पता नहीं लगा और उसी के पीछे कूदे कुछ अँग्रेजी सिपाहियो का भी आज तक पता नहीं लगा।

 lucknow ki bhool bhulaiya
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भूल भुलैया की सुरंग

भूल भुलैया के निर्माण के समय इसमे कारीगरों ने सुरंग भी बनाई और कहा जाता की इस सुरंग का रास्ता सीधे दिल्ली मे मिलता है, पहले के समय मे नवाब और सेना के लिए यह एक गुप्त मार्ग का काम करता था।

जब महल पर किसी भी तरह की कोई आक्रमण हो जाता था तब नवाब और उनकी रानिया इसी गुप्त रास्ते से शहर छोड़ा करते थे लेकिन अब आपको यह सुरंग देखने को नहीं मिलेंगी क्योकि इसे अब पूरा तरह से बंद कर दिया गया है।

भूल भुलैया की शाही बावड़ी

जब आप भूल भुलैया जाएंगे तब आपके सामने सबसे पहले ही उल्टे हाथ ( Left Hand ) पर आपको भूल भुलैया की शाही बावड़ी देखने को मिलेगी जिसमे आपको एक कुंवा देखने को मिलेगा जिसके चरो तरह आपको कुछ कमरे देखने को मिलेंगे और बीच मे पानी देखने को मिलेगा।

कहा जाता की इस पानी का संपर्क पास के गोमती नदी से है क्योकि जब गोमती नदी का पानी बढ़ता तब बावड़ी के कूवा का पानी भी भर जाता है इसके अलावा इस कूवा के अगल बगल मे कई कमरे बने जिसको आराम करने के लिए बनवाया गया था।

भूल भुलैया के कई और भी रहस्य है जिनहे अब पूरी तरह से गुप्त रखा गया है।

भूल भुलैया की मरमत

भूल भुलैया का निर्माण आज से 235 ई पु के लखनऊ मे आसफउद्दौला ने कराया जो आज historical places in lucknow के नाम से प्रसिद्ध है लेकिन इस अब के समय मे इस इतिहास को पूरी तरह से गायब किया जा रहा है।

अब आप यह जानो की आज से 235 साल पहले की बिल्डिंग बिना मरम्मत के कैसे रह सकती इस कारण यह अब दिखने मे बिलकुल ही खराब सा होता जा रहा क्योकि अब इस ऐतिहासिक चीज पर किसी तरह का कोई खर्च नहीं किया जा रहा है।

जिस कारण अब इमारत के कई हिस्से को बंद कर दिया गया और कुछ हिस्से बचे जो बिलकुल ही खराब सा हो चुका दिखने मे इस लिए आप जब भी भूल भुलैया जाए तब आप एक बार इसे सही और मरम्मत करने के लिए अपील करे।

भूल भुलैया का स्थान

दोस्तो अगर आप भी bhool bhulaiya lucknow मे घूमना चाहते हो और आप lucknow मे इसकी location खोज रहे हो तो आप सीधे चारबाग स्टेशन से केसरबाग स्टेशन तक आए और उसके बाद आप केसरबाग से खदरा की तरफ आएंगे।

जब आप खदरा आएंगे तब आप वहा पर किसी से भी भूल भुलैया के बारे मे पूछ कर वहा पर पाहुच सकते हो क्योकि लखनऊ के बच्चे – बच्चे को इस भूल भुलैया के बारे मे पता रहता है।

अन्य जरूरी जानकारी
  • भूल भुलैया का टिकट 50 रुपेय
  • भूल भुलैया खुलने का समय सुबह 9 से 6 बजे तक
  • भूल भुलैया पहुचने के लिए आप उबर , कैब भी कर सकते हो
  • भूल भुलैया के 1 किलो मीटर की दूरी पर आपको जमा मस्जिद और छोटा इमामा बड़ा देखने को मिलेगा
  • भूल भुलैया मे आपको प्रवेश से पहले एक बड़ा सा गेट दिखेगा जिसको रूमी दरवाजा के नाम से जानते है।
Conclusion

दोस्तो आज की इस पोस्ट मे हम आपको lucknow ki bhool bhulaiya के बारे मे बताने जा रहे इस लिए आप अगर places to visit in lucknow मे भूल भुलैया के बारे मे खोज रहे हो तो आप इस पोस्ट को पढे जिसमे आपको भूल भुलैया और उससे जुड़े रहस्यो के बारे मे बहुत ही आसान भाषा मे बताया गया है।

अब अगर आपको यह पोस्ट अच्छी लगी हो तो आप हमे कमेंट के माध्यम से एक सुंदर सा धन्यवाद भेज सकते हो और अगर आप इसी तरह की पोस्ट मे कुछ नया जैसे GNM Full Form In Hindi और CBI Full Form In Hindi के बारे मे जानना चाहते हो तो आप यहा क्लिक करे।

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